ग्वालियर के लिए गौरवः शहर की डीआरडीई लैब के पास है कोरोना की दवा 2-डीजी का पेटेंट, अब कंपनियों को शेयर करेंगे फॉर्मूला

<p><span style="color: #e67e23;"><strong>ग्वालियर के लिए गौरवः</strong></span> शहर की डीआरडीई लैब के पास है कोरोना की दवा 2-डीजी का पेटेंट, अब कंपनियों को शेयर करेंगे फॉर्मूला</p>

कोरोना के पैनिक भरे इस माहौल में डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) की दवा को मंजूरी मिलने से राहत भरी खबर आई है। इस दवा का नाम 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) रखा गया है। देशभर के लोगों को अब इस दवा के उपलब्ध होने का इंतजार है। यह उपलब्धि ग्वालियर के लिए और खास हो जाती है, क्योंकि इस ड्रग का पेटेंट डीआरडीओ की ग्वालियर स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट इस्टेबलिशमेंट (डीआरडीई) लैब के नाम पर मौजूद है। डीआरडीई लैब के डायरेक्टर डॉ. डीके दुबे ने Gwalior Impact से बातचीत में बताया कि शुरूआत में इस दवा को ट्रायल बतौर मरीजों को दिया गया था और इसके नतीजे भी बेहतर आए। अब इसे ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया ने भी मरीजों के इलाज के लिए उपयोग करने की मंजूरी दे दी है। अब इस दवा को तैयार करने की प्रक्रिया का पेटेंट भी डीआरडीई के पास है। इसे जल्द ही इच्छुक कंपनियों के साथ शेयर किया जाएगा, ताकि बड़े स्तर पर दवा का उत्पादन हो सके। दूसरी तरफ डीआरडीओ के डायरेक्टर जनरल डॉ. एके सिंह के मुताबिक अभी इस दवा का उत्पादन 10 हजार डोज प्रतिदिन के हिसाब से हो रहा है, लेकिन जल्द ही बड़े स्तर पर उत्पादन हो सकेगा। अभी इस दवा के उत्पादन के लिए हैदराबाद की रेड्डीज लैब के साथ अनुबंध हुआ है।

ऐसे देंगे कंपनियों को फॉर्मूला
-इस ड्रग का फॉर्मूला किसी कंपनी को हैंडओवर करने से पहले नॉमिनेशन मंगाए जाएंगे यानी जो कंपनी इच्छुक है, वो अपना प्रस्ताव भेज सकती है।
-इसके बाद कंपनी के इंडस्ट्रियल क्रिडेंशियल यानी साख देखी जाएगी। इसके अलावा कंपनी की तकनीकी क्षमताएं भी परखी जाएंगी कि वो मानकों के अनुरूप दवा को तैयार कर सकें।

मालनपुर में हो सकता है प्रोडक्शन
इस दवा का प्रोडक्शन ग्वालियर से 22 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इंडस्ट्रियल एरिया में हो सकता है। इसका कारण यह है कि यहां कई फार्मा कंपनियों की प्रोडक्शन यूनिट हैं। यदि ये कंपनियां डीआरडीओ से संपर्क करती हैं, तो अनुबंध होने के बाद यहां भी दवा का प्रोडक्शन शुरू हो जाएगा।