कैसे रावण की कैद से छूटकर मुरैना में स्थापित हुए शनिदेव और बना शनिचरा मंदिर?

<p><strong>कैसे</strong> <strong>रावण</strong> <strong>की</strong> <strong>कैद</strong> <strong>से</strong> <strong>छूटकर</strong> <strong>मुरैना</strong> <strong>में</strong> <strong>स्थापित</strong> <strong>हुए</strong> <strong>शनिदेव</strong> <strong>और</strong> <strong>बना</strong> <strong>शनिचरा</strong> <strong>मंदिर</strong><strong>?</strong></p>
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हिंदू मान्यताओं के अनुसार हर इंसान को अपने जीवनकाल में शनि की साढ़े साती या ढैया का अनुभव करना पड़ता है। शनि अपने इस ग्रह काल में लोगों को उनके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। शनिदेव के प्रकोप से बचने के लिए लोग हर शनिवार विभिन्न शनि मंदिरों में जाकर दर्शन करते हैं अथवा उनपर तेल अर्पित करते हैं। ऐसे ही कई मंदिरों में एक मंदिर है शनिचरा मंदिर।

मप्र के ग्वालियर स्टेशन से 25 किमी दूर मुरैना जिले के बामौर में स्थित ऐंती पर्वत पर मौजूद है शनिदेव का सबसे प्राचीन मंदिर शनिचरा। वैसे तो देशभर में शनिदेव के कई मंदिर हैं, लेकिन इनमें से तीन मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं। इनमें से प्रमुख मंदिर है मुरैना का यह शनिचरा मंदिर। बाकी दो मंदिरों में से एक है महाराष्ट्र के शिंग्णापुर गांव का शनि शिंग्णापुर मंदिर

महाराष्ट्र के शिंग्णापुर गांव का शनि शिंग्णापुर मंदिर

और दूसरा है उत्तर प्रदेश के कौकिला गांव में स्थित शनिदेव का सिद्ध मंदिर।

उत्तर प्रदेश के कौकिला गांव में स्थित शनिदेव का सिद्ध मंदिर

इन दोनों ही मंदिरों में स्थापित शिला शनिचरा मंदिर से ही ले जाई गयी हैं। कहा जाता है कि इन मंदिरों पर दर्शन करने से शनि कृपा प्राप्त होती है, साथ ही सारे कष्ट एवं प्रकोप दूर हो जाते हैं। कथाओं की मानें, तो रामायण के समय जब हनुमान जी सीता माता को छुड़ाने लंका पहुचे थे, तब उन्हें शनिदेव भी वहां कैद मिले। रावण की कैद में बेहाल शनिदेव ने जब हनुमान जी से मुक्त करने की विनती की, तब  भगवान हनुमान ने शनिदेव को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए इतनी ज़ोर से फेंका कि शनिदेव सीधे ऐंती पर्वत पर उल्का पिंड की तरह आकर गिरे। उस दिन से शनिदेव ने वहीं रहकर तपस्या की और वहीं बस गए। कहते हैं शनिदेव इतनी ज़ोर से गिरे थे कि उस स्थान पर गड्ढा हो गया और वह गड्ढा आज भी वहां मौजूद है।

शनिचरा मंदिर कई चमत्कारों का केंद्र है। शनिचरा मंदिर के पहाड़ों से 84 रहस्यमय झरने बहते हैं, जिनके स्त्रोत की जानकारी किसी को नहीं है। मंदिर के अंदर भी जल कुंड है और इन जलाशयों को लोग रहस्यमय गंगा भी कहते हैं। शनिचरा मंदिर में शनिदेव के साथ साथ हनुमान जी, गणेश जी, राधा-कृष्ण और माता काली का भी मंदिर है। स्थानीय लोगों की मानें, तो उन्हें शनिदेव के दर्शन कई बार अलग-अलग रूपों में हुए हैं। कभी साधु के रूप में, तो कभी कोई योगी के रूप में। लोग कहते हैं कि ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन और स्नान के लिए आए लोगों को अक्सर शनिदेव दर्शन देते हैं। हर शनिवार को यहां भारी संख्या में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ जमा होती है।

हर साल फागुन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या के अवसर पर यहां भव्य मेले का आयोजन होता है। जब यह अमावस्या शनिवार के दिन पड़ती है, तो उसे शनिश्चरी अमावस्या कहा जाता है।

इस मेले का आनंद लेने के लिए देशभर से लाखों की तादाद में भक्त आते हैं। शनिदेव के अभूतपूर्व दर्शन और उनके चमत्कारों का अनुभव करने के लिए आप भी अवश्य पधारें मुरैना जिले के शनिचरा मंदिर।