आखिर क्यों ख़ास है आईएनएस विक्रांत ? क्यों अब तक नहीं हुआ फाइटर प्लेन का ट्रायल ?

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देश में बना पहला एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत नौसेना में शामिल हो गया है। पीएम नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार यानी 2 सितंबर की सुबह 10.45 बजे देश में बने सबसे बड़े एयरक्राफ्ट कैरियर INS विक्रांत नौसेना के हवाले कर दिया। कई खूबियों से लैस INS विक्रांत के रूप में नेवी को देश में बना अपना सबसे बड़ा युद्धपोत मिल गया है। 

 क्या है आईएनएस विक्रांत ?
आईएनएस विक्रांत भारत का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर है। 1971 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में भारत की निर्णायक जीत में अहम् भूमिका निभाई थी। युद्ध के समय पाकिस्तान का सबसे बड़ा दर आईएनएस विक्रांत ही था जिसकी वजह से पाकिस्तान को अपनी गाज़ी पनडुब्बी से हाथ धोना पड़ा था। यह सबसे पहले ब्रिटिश रॉयल नेवी के लिए 14 अक्टूबर 1943 को HMS (हर मैजिस्टी शिप ) हरक्यूलिस के रूप में बनाया गया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद सन 1961 में यह एयरक्राफ्ट भारत आया और बॉम्बे हार्बर में भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल हो गया। 

क्या है आईएनएस विक्रांत की खूबियां  ?

1 . INS विक्रांत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड यानी CSL ने किया है। इसे वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है, जिसे पहले नौसेना डिजाइन निदेशालय के रूप में जाना जाता था। ये भारतीय नेवी का इन-हाउस डिजाइन संगठन है।
2 . इस विहानवाहक पोत का वजन करीब 45 हजार टन है और इसे बनाने में तकरीबन 20 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। 
3 . INS विक्रांत की लंबाई 262 मीटर और चौड़ाई 62 मीटर है। भारत में निर्मित यह अब तक का सबसे बड़ा जंगी जहाज है। 
4 . आईएनएस विक्रांत में फ्यूल के 250 टैंकर और 2400 कंपार्टमेंट्स हैं। इस पर एक बार में 1600 क्रू मेंबर्स और मिग-29 और हेलिकॉप्टर समेत 30 विमान तैनात हो सकते हैं। इस युद्धपोत की क्षमता 1600 लोगों की है। 
5 . अभी तक भारत के पास केवल एक विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रमादित्य था, जिसे रूस में बनाया गया था।  भारतीय रक्षा बल कुल तीन एयरक्राफ्ट कैरियर की मांग कर रहे थे, जिन्हें हिंद महासागर और बंगाल की खाड़ी में दो मुख्य नौसैनिक मोर्चों पर तैनात किया जाना है और एक अतिरिक्त रखना है। 
6 .आईएनएस विक्रांत से पांच हज़ार घरों को बिजली सप्लाई की जा सकती है। साथ ही इस पर कुल 7 डाइनिंग हॉल है। व इसके किचन में 10 , 000 रोटियां बनायीं जा सकती है। 
7 . देश में बने इस युद्धपोत पर 2,300 कम्पार्टमेंट है। महिला नौसेनिकों के लिए ख़ास केबिन है। 
8 . इसमें मल्टीस्पेशिलिटी हॉस्पिटल और पूल की सुविधा है।
9 . एक बार ईधन भरने परयह युद्ध पोत 45 दिनों तक समुद्र में रह सकता है। इसे समुद्र में ही रिफिल भी किया जा सकता है। 
10 . पूरी तरह लोड होने पर इसका डिस्प्लेसमेंट करीब 42 , 800 टन और मैक्सिमम स्पीड 51 किलोमीटर प्रति घंटा है। 

आईएनएस विक्रांत पर क्यों नहीं हुआ अब तक फाइटर प्लेन का ट्रायल ?
आईएनएस विक्रांत पर फाइटर प्लेन के ट्रेल न शरू होने की कई वजह रही। 


पहली वजह -
INS विक्रांत को लेकर 25 अगस्त को नेवी के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे ने बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि नेवी MiG-29K फाइटर प्लेन की विक्रांत पर लैंडिंग का ट्रायल इस साल नवंबर में शुरू करेगी। ये ट्रायल 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा। इसलिए INS विक्रांत पूरी तरह ऑपरेशनल 2023 के अंत तक ही हो पाएगा। भारतीय नेवी के आधिकारिक बयान में कहा गया कि वह एयरक्राफ्ट कैरियर्स को बनाने के लिए विकसित देशों के नियमों का ही पालन कर रही है। 2 सितंबर को आधिकारिक तौर पर विक्रांत के नेवी में शामिल होने के बाद ही उसके फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट और उसकी एविएशन फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स यानी AFC सुविधाओं की शुरुआत होगी। नेवी ने कहा था कि इसे तभी शुरू किया जाएगा, जब शिप के कमांड और कंट्रोल के साथ ही फ्लाइट सेफ्टी उसके हाथों में होगी।

दूसरी वजह 
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगले कई महीनों में INS विक्रांत का एविएशन फैसिलिटी कॉम्प्लेक्स यानी AFC पूरी तरह से रूसी इंजीनियरों और टेक्नीशियन की मदद से स्थापित किया जाएगा। इन इंजीनियरों के भारत में आने में यूक्रेन पर हमले की वजह से रूस पर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण देरी हो सकती है।

आईएनएस विक्रांत।

तीसरी वजह 
इंडियन नेवी ने 2009 से 2017 के दौरान रूस से करीब 2 अरब डॉलर यानी करीब 16 हजार करोड़ रुपए में 45 मिग-29 फाइटर प्लेन खरीदे थे। पिछले कुछ सालों में मिग ऑपरेशनल मामले में बेअसर साबित हुए हैं। 

मिग की जगह राफेल, F-18 और तेजस होंगे विक्रांत पर तैनात 


NS विक्रांत के AFC को भी INS विक्रमादित्य की तरह ही रूसी मिग-29 फाइटर प्लेन के ऑपरेशन के लिए बनाया गया था। मिग में आ रही दिक्कतों के चलते इसकी जगह बेहतर डेक-बेस्ड फाइटर प्लेन की तलाश की जा रही है। इसके लिए फ्रांस के राफेल और अमेरिका के बोइंग F-18 'सुपर हॉर्नेट' फाइटर प्लेन की खरीद के लिए भी बातचीत चल रही है। ये दोनों फाइटर प्लेन गोवा में INS हंसा पर इंडियन नेवी की तट-आधारित टेस्ट फैसिलिटी यानी STBF में फ्लाइट ट्रायल पूरा कर चुके हैं।
विक्रांत पर तैनाती के लिए नेवी जल्द ही 26 डेक-बेस्ड फाइटर प्लेन खरीदने के लिए बातचीत कर रही है। इसके लिए राफेल और F-18 फाइटर प्लेन को बनाने वाले देशों फ्रांस और अमेरिका के बीच कड़ी टक्कर है। 

आईएनएस कब होगा ऑपरेशनल ?

नेवी वाइस चीफ ऑफ स्टाफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमडे के अनुसार नेवी  MiG-29K फाइटर प्लेन की विक्रांत पर लैंडिंग का ट्रायल इस साल नवंबर में शुरू होगा। ट्रायल 2023 के मध्य तक पूरा हो जाएगा। इसलिए INS विक्रांत पूरी तरह ऑपरेशनल 2023 के अंत तक हो पायेगा।